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Disa shool

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*💥दिशाशूल क्या होता है ? क्यों बड़े बुजुर्ग तिथि देख कर आने जाने की रोक टोक करते हैं 💥??* *आज की युवा पीढ़ी भले ही उन्हें आउटडेटेड कहे ..लेकिन बड़े सदा बड़े ही रहते हैं ..इसलिए आदर करेंं, उनकी बातों का ; *दिशाशूल समझने से पहले हमें दस दिशाओं के विषय में ज्ञान होना आवश्यक है...!! *हम सबने पढ़ा है कि दिशाएं ४ होती हैं...!! १) पूर्व २) पश्चिम ३) उत्तर ४) दक्षिण   *परन्तु जब हम उच्च शिक्षा ग्रहण करते हैं तो ज्ञात होता है कि वास्तव में दिशाएँ दस होती हैं...!!** १) पूर्व २) पश्चिम ३) उत्तर ४) दक्षिण ५) उत्तर - पूर्व ६) उत्तर - पश्चिम ७) दक्षिण – पूर्व ८) दक्षिण – पश्चिम ९) आकाश १०) पाताल *हमारे सनातन धर्म के ग्रंथो में सदैव १० दिशाओं का ही वर्णन किया गया है, जैसे हनुमान जी ने युद्ध इतनी आवाज की किउनकी आवाज दसों दिशाओं में सुनाई दी |  *हम यह भी जानते हैं कि प्रत्येक दिशा के देवता होते हैं |   *दसों दिशाओं को समझने के पश्चात अब हम बात करते हैं वैदिक ज्योतिष की | *ज्योतिष शब्द “ज्योति” से बना है जिसका भावार्थ होता है “प्रकाश”...!! *वैदिक ज्योतिष में अत्यंत विस्तृत रूप में...

sachchi bhakti

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🌳🦚 आज की कहानी 🦚🌳 💐💐ईश्वर सबकी सुनता हैं💐💐 शहर के बीचोबीच एक हाए सोसाइटी की बिल्डिंग थीं । उसमें सबसे ऊपर वाले फ्लोर पर अविनाश रहता था । वो रोज खाना खाने के बाद रात को 9 से 10 बजे तक ऊपर छत पर घूमता था । और उस बिल्डिंग के पास ही कुछ जुग्गी झोपड़ी बनी हुई थी । पिछले एक-डेढ़ महीने से वो रोज उस बच्चे को देख रहा था, जो रोज एक गुब्बारे को छोड़ देता था और उसे तब तक देखता रहता जब तक वह आँखों से ओझल न हो जाए ।  एक दिन अविनाश दोस्त से बात करने में थोड़ा लेट हो गया । और जब ऊपर घूमने गया तो उसे वो बच्चा नहीं दिखा । अविनाश ने ऊपर देखा की कही गुब्बारा उड़ता हुआ दिख जाये । तो उसे वो गुब्बारा पानी की टंकी में अटका हुआ दिखा । अविनाश समझ गया की यह उस बच्चे का ही है । और उसने सोचा की उस गुब्बारे को निकालकर उड़ा दूँ । और वह टंकी पर चढ़ा । उसने देखा गुब्बारे पर कुछ लिखा हुआ था। अविनाश उसे पढ़कर बैचेन हो गया ।  उस पर लिखा था कि ....... हे ऊपर वाले मेरी माँ की तबियत बहुत खराब है और उसके इलाज के लिए किसी को भेज दें मेरे पास इतने सारे पैसे नहीं है । यह पढ़कर अविनाश को रात भर नींद नहीं आयी ...

jivan jine ki kala

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🌳🦚आज की कहानी🦚🌳 💐💐मेरे जीवन जीने की कला💐💐 मेरे बचपन मे मेरे गाँव में पंचायत लगी थी। वहीं थोड़ी दूरी पर एक सन्त ने अपना बसेरा किया हुआ था। जब पंचायत किसी निर्णय पर नहीं पहुच सकी तो किसी ने कहा कि क्यों न हम महात्मा जी के पास अपनी समस्या को लेकर चलें, अतः सभी सन्त के पास पहुँचे। जब सन्त ने गांव के लोगों को देखा तो पुछा कि कैसे आना हुआ ? तो लोगों ने कहा, “महात्मा जी गाँव भर में एक ही कुआँ हैं और कुँए का पानी हम नहीं पी सकते, बदबू आ रही है।” सन्त ने पुछा- हुआ क्या ? पानी क्यों नहीं पी सकते हो ? लोग बोले- तीन कुत्ते लड़ते लड़ते उसमें गिर गये थे। बाहर नहीं निकले, मर गये उसी में। अब जिसमें कुत्ते मर गए हों, उसका पानी कैसे पिये महात्मा जी ? सन्त ने कहा - 'एक काम करो, उसमें गंगाजल डलवाओ। कुएं में गंगाजल भी आठ दस बाल्टी छोड़ दिया गया। फिर भी समस्या जस की तस रही। लोग फिर से सन्त के पास पहुँचे। अब सन्त ने कहा, "भगवान की कथा कराओ।” लोगों ने कहा, “ठीक है।” कथा हुई, फिर भी समस्या जस की तस। लोग फिर सन्त के पास पहुँचे। अब सन्त ने कहा, उसमें सुगंधित द्रव्य डलवाओ। सुगंधित द्रव्...

Raja athiti pagdi

🌳🦚आज की कहानी🦚🌳 💐💐राजा और अतिथि की पगड़ी💐💐 एक राजा ने दरबार में सुबह ही सुबह दरबारियों को बुलाया । उसका दरबार भरता ही जाना था की एक अजनबी यात्री वहा आया । वह किसी दूर देश का रहने वाला होगा । उसके वस्त्र पहचाने हुए से नही मालूम पड़ते थे । उसकी शक्ल भी अपरिचित थी , लेकिन वह बड़े गरिमाशाली और गौरवशाली व्यक्तित्व का धनी मालूम होता था । सारे दरबार के लोग उसकी तरफ देखते ही रह गए । उसने एक बड़ी शानदार पगड़ी पहन रखी थी । वैसी पगड़ी उस देश में कभी नही देखी गयी थी । वह बहोत रंग – बिरंगी छापेदार थी । ऊपर चमकदार चीजे लगी थी । राजा ने पूछा – अतिथि ! क्या मै पूछ सकता हु की यह पगड़ी कितनी महंगी है और कहा से खरीदी गयी है ? उस आदमी ने कहा – यह बहुत महंगी पगड़ी है । एक हजार स्वर्ण मुद्रा मुझे खर्च करनी पड़ी है । वजीर राजा की बगल में बैठा था । और वजीर स्वभावतः चालाक होते है , नही तो उन्हें कौन वजीर बनाएगा ? उसने राजा के कान में कहा – सावधान ! यह पगड़ी बीस – पच्चीस रुपये से जादा की नही मालूम पड़ती । यह हजार स्वर्ण मुद्रा बता रहा है । इसका लूटने का इरादा है । उस अतिथि ने भी उस वजीर को , जो राजा के कान में कु...

pragati ka rasta

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🌳🦚आज की कहानी🦚🌳 💐💐प्रगति का रास्ता💐💐 एक विद्वान किसी गाँव से गुजर रहा था,  उसे याद आया, उसके बचपन का मित्र इस गावँ में है, सोचा मिला जाए ।  मित्र के घर पहुचा, लेकिन देखा, मित्र गरीबी व दरिद्रता में रह रहा है, साथ मे दो नौजवान भाई भी है। बात करते करते शाम हो गयी, विद्वान ने देखा, मित्र के दोनों भाइयों ने घर के पीछे आंगन में फली के पेड़ से कुछ फलियां तोड़ी, और घर के बाहर बेचकर चंद पैसे कमाए और दाल आटा खरीद कर लाये। मात्रा कम थी, तीन भाई व विद्वान के लिए भोजन कम पड़ता,  एक ने उपवास का बहाना बनाया,  एक ने खराब पेट का।  केवल मित्र, विद्वान के साथ भोजन ग्रहण करने बैठा। रात हुई,  विद्वान उलझन में कि मित्र की दरिद्रता कैसे दूर की जाए?, नींद नही आई,  चुपके से उठा, एक कुल्हाड़ी ली और आंगन में जाकर फली का पेड़ काट डाला और रातों रात भाग गया। सुबह होते ही भीड़ जमा हुई, विद्वान की निंदा हरएक ने की, कि तीन भाइयों की रोजी रोटी का एकमात्र सहारा, विद्वान ने एक झटके में खत्म कर डाला, कैसा निर्दयी मित्र था?? तीनो भाइयों की आंखों में आंसू थे। 2-3 बरस बीत गए,  विद्वा...

लौकी का जूस

*🌻हाई BP, हाई कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोग में लौकी के जूस से 'बाई पास सर्जरी' से बचना🌻* छिलका सहित लंबी वाली लौकी (घिया) ले कर कद्दूकस कर लें, इसके बाद इसे सिलबट्टे या ग्राइंडर से पीस लें, पीसते समय इसमें 7 तुलसी, 5 पुदिने की पत्तियां मिला लें, इस पिसे हुए पेस्ट को साफ कपडे से छान लें, ये रस 125 ग्राम होना चाहिए, इस रस में 125 ग्राम साफ पानी मिला कर 250 ग्राम बना लें, अब इसमें 4 पिसी काली मिर्च और एक ग्राम सेंधा नमक मिला लें,  ये दवा की *एक मात्रा* तैयार हो गयी। *सेवन विधि :* हृदय रोगी को दिन में 3 बार सुबह दोपहर शाम भोजन के आधा घंटे बाद एक मात्रा लेनी है। पहले 3 -4 दिन इस दवा को पीने से पेट में कुछ गड़गड़ाहट होगी, पतले दस्त हो सकते हैं, उनसे घबराना नही है, 3 -4 दिनों में पेट के सभी विकार मल के साथ बाहर निकल कर पेट स्वस्थ हो जाएगा। *इस उपचार को दो से तीन महीने आवश्यकता अनुसार लेने से हृदय रोगी ठीक हो जाते हैं, बाई पास सर्जरी की ज़रूरत नही रहती, ये अनुभूत उपचार है, कभी असफल नही होता।* || जय श्री हरि ||

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🌳🦚आज की कहानी🦚🌳 💐💐हृदय परिवर्तन💐💐 एक राजा को राज भोगते काफी समय हो गया था। बाल भी सफ़ेद होने लगे थे। एक दिन उसने अपने दरबार में उत्सव रखा और अपने गुरुदेव एवं मित्र देश के राजाओं को भी सादर आमन्त्रित किया। उत्सव को रोचक बनाने के लिए राज्य की सुप्रसिद्ध नर्तकी को भी बुलाया गया। राजा ने कुछ स्वर्ण मुद्रायें अपने गुरु जी को भी दीं, ताकि नर्तकी के अच्छे गीत व नृत्य पर वे उसे पुरस्कृत कर सकें। सारी रात नृत्य चलता रहा। ब्रह्म मुहूर्त की बेला आयी। नर्तकी ने देखा कि मेरा तबले वाला ऊँघ रहा है, उसको जगाने के लिए नर्तकी ने एक दोहा पढ़ा -  "बहु बीती, थोड़ी रही, पल पल गयी बिताई।  एक पलक के कारने, ना कलंक लग जाए।" अब इस दोहे का अलग-अलग व्यक्तियों ने अपने अनुरुप अर्थ निकाला। तबले वाला सतर्क होकर बजाने लगा। जब यह बात गुरु जी ने सुनी। गुरु जी ने सारी मोहरें उस नर्तकी के सामने फैंक दीं। वही दोहा नर्तकी ने फिर पढ़ा तो राजा की लड़की ने अपना नवलखा हार नर्तकी को भेंट कर दिया। उसने फिर वही दोहा दोहराया तो राजा के पुत्र युवराज ने अपना मुकट उतारकर नर्तकी को समर्पित कर दिया। नर्तकी फिर वही दोहा...

jai shree shyam

🚩🙏🏻🦚🏹👑🏹🐎🙏🏻🚩   🚩🏹🏹🏹🌹🌹🌹🚩        🚩श्री  गणेशाय नमः 🚩     🚩श्री श्याम देवाय नमः🚩 🚩जय श्री मेरे प्यारे श्याम बाबा🚩    🚩हारे के सहारे की जय🚩   🚩हारो के लखदातार की जय🚩     🚩शीश के दानी की जय 🚩 🚩वृंदावन बिहारीलाल  की जय 🚩                  🚩राधे  राधे 🚩 🚩जय सिया राम जय जय सिया राम🚩 🚩जय श्री सालासर बालाजी महाराज की जय🚩             🚩जय माता दी🚩            🚩हर हर महादेव🚩